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Monday, July 5, 2021

१. संज्ञाप्रकरणम्

 

   १. संज्ञाप्रकरणम्  


मुनित्रयं नमस्कृत्य तदुक्तीः परिभाव्य च । 

वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदीयं विरच्यते ।।


माहेश्वरसूत्राणि

१ - अ इ उ ण्।

२ - ऋ ऌ क्।

३ - ए ओ ङ्।

४ - ऐ औ च्।

५ - ह य व र ट्।

६ - ल ण्।

७ - ञ म ङ ण न म्।

८ - झ भ ञ्।

९ - घ ढ ध ष्।

१० - ज ब ग ड द श्।

११ - ख फ छ ठ थ च ट त व्।

१२ - क प य्।

१३ - श ष स र्।

१४ - ह ल्।

इति माहेश्वराणि सूत्राण्यणादिसंज्ञार्थानि।। एषामन्त्या इतः।। लणसूत्रेsकारश्च।। हकारादिष्वकार उच्चारणार्थः।।

Wednesday, May 26, 2021

अभिज्ञानशाकुन्तलम्

 

     अभिज्ञानशाकुन्तलम्



रचनाकार थे कालिदास।


उपमा सम्राट किसे कहा जाता है?


-कालिदास जी को


कितने अंक है?


-सात


नायक कौन है?


दुष्यन्त


नायिका कौन है?


शकुन्तला


"अभिज्ञानशाकुन्तलम्" नाटक की उपजीव्य का आधार क्या है?


-महाभारत का आदिपर्व।


"अभिज्ञानशाकुन्तलम्" नाटक का प्रारम्भ कैदी से होता है?


-नान्दी स्तुति से।


"रस -श्रृंगार रस


"अभिज्ञानशाकुन्तलम्" नाटक में कौन सा गुण है?


।-प्रसाद गुण।



शकुन्तला के पिता कौन थे?


-विश्वामित्र


शकुन्तला के धर्मपिता कौन थे?


उत्तर-कण्व


शकुन्तला की माता कौन थी?


मेनका


"अभिज्ञानशाकुन्तलम्" नाटक के विदूषक का नाम क्या था?


-माढव्य


शकुन्तला - दुष्यन्त का कैसा विवाह था?


-गन्धर्व विवाह


शकुन्तला को शाप कौन दिए?


-दुर्वासा


वसुमती कौन थी?


दुष्यन्त की द्वितीय पटरानी।


महर्षि कण्व का आश्रम कंहाँ था?


मालिनी नदी के तट पर।


राजा दुष्यन्त के आश्रम में आगमन पर कण्व ऋषि कंहाँ गए हुए थे?


सोमतीर्थ


शकुन्तला की प्रिय सखी कौन थी?


प्रियम्बदा।


शकुन्तला के पुत्र का नाम क्या था?


सर्वदमन (भरत)


अभिज्ञान क्या है?


अंगूठी का नाम।


शकुन्तला की अंगूठी कंहाँ गिर जाता है?


शचीतीर्थ में।




1-अभिज्ञानशाकुतलम का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद "विलियमजोन्स" ने किया।

2-अभिज्ञानशाकुतलम का दुष्यंत नायक है-धीरोदात्त प्रकृति का।

3-अभिज्ञानशाकुतलम में रीति है -वेदर्भी ।

4-"अभिज्ञान" शब्द का अर्थ है-पहचान ।

5-शर्मिष्ठा के पिता थे-वृषपर्वा

6-शाप से मुक्ति के लिए दुर्वासा से "प्रियम्बदा" ने निवेदन किया।

7-गौतमी वृद्धा तापसी थी।

8-शकुन्तला को विदाई का संदेश दिया- कण्व ने।

9-परिजन का अर्थ है- सेवकजन।

10-निक्षेप का अर्थ है - धरोहर।


11-अभिज्ञानशाकुंतलं में समास है -मध्यम्पदलोपी

12-अभिज्ञानशाकुंतलं में कुल श्लोक 196

13-अभिज्ञानशाकुन्तलम में अंक है - 7

14-अभिज्ञानशाकुंतलं में नायक की प्रकृति है धीरोदात्त।

15-अभिज्ञानशाकुन्तल में नायिका की प्रकृति है मुग्धा

16- अभिज्ञानशाकुन्तलम के रचयिता - उपमा सम्राट महाकवि कालिदास हैं l

17- शकुंतला के जनक - विश्वामित्र व मेनका l

18- अवसितमंडना कौन है -शकुंतला

19- शर्मिष्ठा व ययाति के पुत्र का नाम -पुरु

20- कन्या कीदृशः अर्थः अस्ति ?- परकीयः


21- अद्य का यास्यति ? - शकुंतला

22- मुनीनां धनं किम अस्ति ?- संयम

23- प्रकृतिपेलवा का ? - शकुन्तला

24- वैतानास्त्वां वह्नयः पावयन्तु का वक्ता कौन है - काश्यप

25- कस्मिन समये शकुंतलाया: उत्स्व: भवति ?- कुसुम प्रसूति समये

26- सूर्योदये एव का शिखामज्जिता ? - शकुन्तला

27- वामहस्तोपहित वदना का अस्ति ?- शकुन्तला

बुद्धचरितं - महाकाव्य

 

  बुद्धचरितं - महाकाव्य




कथा वस्तु:- 


बुद्धचरितं महाकाव्य जो संस्कृत में उपलब्ध प्रथम ग्रन्थ है जिसमे भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र एवं सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। इसे बौद्धों का रामायण भी माना जाता है।


लेखक:- अश्वघोष


काल:- प्रथम शताब्दी (लगभग ७८ई.)


सर्ग:- २८ सर्ग परन्तु संस्कृत में १४।


कथावस्तु- ललित विस्तार नामक बौद्ध ग्रन्थ।


नायक:- बुद्ध (धीरोदात्त और धीरप्रशांत नायक)


रस:- शान्त रस।


छंद - उपजाति और अनुष्टुप् ।


मुख्य अलंकार:- अनुप्रास, उत्प्रेक्षा, उपमा, रूपक यमक,और अर्थान्तरन्यास।


मुख्य रीति:- शुद्ध वैदर्भी।


मुख्य गुण:- प्रसाद व माधुर्य।


मुख्य पात्र:- शुद्धोदन ,महामाया, गौतम बुद्ध, यशोधरा, छन्दक, बिम्बिसार, कामदेव और श्रवण।


कपिलवस्तु जनपद के राजा शुद्धोदन, रानी महामाया



बुद्धचरित के सर्ग:-


बुद्धचरितम् मूल रूप में अपूर्ण ही उपलब्ध है। 28 सर्गों में विरचित इस महाकाव्य के दूसरे सर्ग से लेकर तेरहवें सर्ग तक पूर्ण रूप से तथा पहला एवं चौदहवाँ सर्ग के कुछ अंश ही मिलते हैं। इस महाकाव्य के शेष सर्ग संस्कृत में उपलब्ध नहीं है। प्रथम चौदह सर्गों के नाम इस प्रकार हैं-


१.भगवत्प्रसूति,


२.अन्तःपुरविहार


३.संवेगोत्पत्तिः


४.स्त्रीविघातन


५.अभिनिष्क्रमण


६.छन्दकनिवर्तनम्


७.तपोवनप्रवेशम्


८.अंत:पुरविलाप


९.कुमारान्वेषणम्


१०.श्रेणभिगमनम्


११कामविगर्हणम्


१२आराडदर्शन


१३मारविजय


१४.बुद्धत्वप्राप्ति।

षोडश संस्काराणां क्रमशः कण्ठस्थीकरणसूत्रम्-

 

    षोडश संस्काराणां क्रमशः कण्ठस्थीकरणसूत्रम्-


गपुंसीजानान्यचूकव्युवेकेसमवर्तनैः।

विवाहान्त्येष्टिसंस्कारैर्षोडशैर्मानवोच्यते।।

१. ग  = गर्भाधान

२. पुं  = पुंसवन

३. सी = सीमन्तोन्नयन

४. जा = जातकर्म

५. ना = नामकरण

६. नि = निष्क्रमण (नि+अ)

७. अ = अन्नप्राशन

८. चू = चूडाकरण/मुण्डन

९. क = कर्णवेध

१०.वि= विद्यारम्भ (वि+उ)

११. उ= उपनयन

१२. वे= वेदारम्भ

१३.के= केशान्त/गोदान

१४.स= समावर्तन

१५.वि= विवाह

१६.अ= अन्त्येष्टि

शिशुपालवध महाकाव्यम्

 


      शिशुपालवध महाकाव्यम्



★महाकवि माघ का स्थितिकाल:- ६७५ ई. (लगभग) या भारवि के बाद का समय।


★जन्म स्थान:- भीनमाल, जिला:-जालौर,राजस्थान।


★महाकवि माघ के पिता:- श्री सुप्रभवदेव


★महाकवि माघ का जाति:- श्रीमाली ब्राह्मण


★महाकवि माघ की उपाधि:- घण्टामाघ 


★महाकवि माघ  का प्रिय छन्द:- मालिनी।


★माघ के मृत्यु का कारण:- पादशोथ रोग।


           शिशुपालवध महाकाव्य


★शिशुपालवध महाकाव्य के लेखक:- महाकवि माघ।


★शिशुपालवध महाकाव्य में कुल सर्गः-२० सर्ग


★शिशुपालवध महाकाव्य में कुल श्लोक:- १६५०


★शिशुपालवध महाकाव्य का उपजीव्य:-

  १. महाभारत का सभापर्व 

  २. श्रीमद्भागवत् पुराण का दशम स्कन्ध ।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रधान रस:- वीर रस


★शिशुपालवध महाकाव्य का सहायक रस:- श्रृंगार व हास्य।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रमुख छन्द:- वंशस्थ, अनुष्टुप, उपजाति और वसन्ततिलका।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रमुख अलंकार:- उपमा, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति,यमक, श्लेष ,रूपक।


★शिशुपालवध महाकाव्य का नायक:- श्रीकृष्ण


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रतिनायक:- चेदिनरेश शिशुपाल।


★शिशुपालवध महाकाव्य की मुख्य कथावस्तु:- भगवान् कृष्ण द्वारा शिशुपाल का वध किए जाने का वर्णन।


★शिशुपाल की राजधानी:- महिष्मती


★शिशुपाल का राज्य:- चेदि


★द्वारिका का राजा:- श्रीकृष्ण


★हिरण्यगर्भ और ब्रह्मा के मानस पुत्र:- नारद जी


★शिशुपाल का मौसेरा भाई:- श्रीकृष्ण


★शिशुपालबध के तेजस्वी ऋषि:- नारद


★शिशुपाल का पूर्वजन्म:-हिरण्यकश्यपु, रावण,    शिशुपाल क्रमशः।


★शिशुपालवध महाकाव्य श्री शब्द से प्रारम्भ है और प्रत्येक सर्ग का अंत भी श्री शब्द से हीं हुआ है।


★शिशुपालबध "काव्येषु माघ:" से भी प्रसिद्ध है।


★शिशुपालवध महाकाव्य में राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर करते हैं।


★श्रीकृष्ण शिशुपाल को १००गलती माफ़ करने का वचन दे रखे थे।


★शिशुपाल का वध  श्रीकृष्ण, बलराम और उद्धव जी तीनों मिलकर किये थे।


माघ के लिए प्रचलित उक्तियाँ



१.मेघे माघे गतं वयः।


२. माघे सन्ति त्रयोः गुणाः।


३.तवाद् भा भारवेर्भाति, यावन्माघस्य नोदयः।


४. नवसर्ग गते माघे नव शब्दों न विद्यते।

संस्कृत के व्याकरण ग्रन्थ और उनके रचयिता

 

     संस्कृत के व्याकरण ग्रन्थ और उनके रचयिता


संग्रह -- व्याडि (लगभग ई. पू. 400 ; व्याकरण के दार्शनिक विवेचन का आदि ग्रन्थ)


अष्टाध्यायी -- पाणिनि


महाभाष्य -- पतञ्जलि


वाक्यपदीय -- भर्तृहरि (लगभग ई. 500, व्याकरणदर्शन का सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ)


त्रिपादी (या, महाभाष्यदीपिका) -- भर्तृहरि (महाभाष्य की टीका)


काशिकावृत्ति -- जयादित्य तथा वामन (छठी शती)


वार्तिक -- कात्यायन


प्रदीप -- कैयट


सूक्तिरत्नाकर -- शेषनारायण


भट्टिकाव्य (या, रावणवध) -- भट्टि (सातवीं शती)


चान्द्रव्याकरण -- चन्द्रगोमिन्‌


कच्चान व्याकरण -- कच्चान (पालि का प्राचीनतम उपलब्ध व्याकरण)


मुखमत्तदीपनी -- विमलबुद्धि (कच्चान व्याकरण की टीका तथा न्यास, 11वीं सदी)


काशिकाविवरणपंजिका (या, न्यास) -- जिनेन्द्रबुद्धि (लगभग 650 ई., काशिकावृत्ति की टीका)


शब्दानुशासन -- हेमचन्द्राचार्य


पदमञ्जरी -- हरदत्त (ई. 1200, काशिकावृत्ति की टीका)


सारस्वतप्रक्रिया -- स्वरूपाचार्य अनुभूति


भागवृत्ति (अनुपलब्ध, काशिका की पद्धति पर लिखित)


भाषावृत्ति -- पुरुषोत्तमदेव (ग्यारहवीं शताब्दी)


सिद्धान्तकौमुदी -- भट्टोजि दीक्षित (प्रक्रियाकौमुदी पर आधारित)


प्रौढमनोरमा -- भट्टोजि दीक्षित (स्वरचित सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


वैयाकरणभूषणकारिका -- भट्टोजि दीक्षित


शब्दकौस्तुभ -- भट्टोजि दीक्षित (ई. 1600, पाणिनीय सूत्रों की अष्टाध्यायी क्रम से एक अपूर्ण व्याख्या)


बालमनोरोरमा -- वासुदेव दीक्षित (सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


रूपावतार -- धर्मकीर्ति (ग्यारहवीं शताब्दी)


मुग्धबोध -- वोपदेव


प्रक्रियाकौमुदी -- रामचन्द्र (ई. 1400)


मध्यसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


लघुसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


सारसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


प्रक्रियासर्वस्व -- नारायण भट्ट (सोलहवीं शताब्दी)


प्रसाद -- विट्ठल


प्रक्रियाप्रकाश -- शेषकृष्ण


तत्वबोधिनी -- ज्ञानेन्द्र सरस्वती (सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


शब्दरत्न -- हरि दीक्षित (प्रौढमनोरमा की टीका)


मनोरमाकुचमर्दन -- जगन्नाथ पण्डितराज (भट्टोजि दीक्षित के "प्रौढ़मनोरमा" नामक व्याकरण के टीकाग्रंथ का खंडन)


स्वोपज्ञवृत्ति -- (वाक्यपदीय की टीका)


वैयाकरणभूषणसार -- कौण्डभट्ट (ई. 1600)


वैयाकरणसिद्धान्तमञ्जूषा -- नागेश भट्ट(व्याकरणदर्शनग्रंथ)


परिभाषेन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (इस यशस्वी ग्रन्थ पर अनेक टीकाएँ उपलब्ध हैं।)


लघुशब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)


बृहच्छब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)


शब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट


वैयाकरणसिद्धान्तलघुमञ्जूषा -- नागेश भट्ट


वैयाकरणसिद्धान्तपरमलघुमञ्जूषा -- नागेश भट्ट


महाभाष्य-प्रत्याख्यान-संग्रह -- नागेश भट्ट


उद्योत -- नागेश भट्ट (पतञ्जलिकृत महाभाष्य पर टीकाग्रन्थ)


स्फोटवाद -- नागेश भट्ट


स्फोटचन्द्रिका -- कृष्णभट्टमौनि


स्फोटसिद्धि -- भरतमिश्र


परिभाषावृत्ति -- सीरदेव


परिभाषावृत्ति -- पुरुषोत्तमदेव


परिभाषाप्रकाश -- विष्णुशेष


गदा -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


भैरवी -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


भावार्थदीपिका -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


हरिनामामृतव्याकरण -- जीव गोस्वामी


परिमल -- अमरचन्द

रामायण (आदिकाव्य) / महाभारत



      रामायण (आदिकाव्य)


*राम+अयन =दीर्घसन्धि

*रचयिता ः महर्षि वाल्मीकि(आदिकवि) 

* सर्ग=645

*श्लोक =24000(चतुर्विंशतिसाहस्रीसंहिता)

*लौकिक संस्कृत का प्रथम श्लोक - मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समा। 

*प्रमुख छन्द - अनुष्टुप 

*मुख्य रस- करुण

*कुल काण्ड =7 बालकांड, अयोध्या,अरण्य, किषकिन्धा, सुन्दर, युद्ध, उत्तरकांड। 


*राजादशरथ +कौशल्या, कैकयी. सुमित्रा 

चार पुत्र - राम, भरत. लक्ष्मण. शत्रुघ्न। 

पुत्री =शांता (श्रृंगी ऋषि से विवाह) 


1बालकांड =क्रौञ्च प्रकरण, अश्वमेध यज्ञ का वर्णन, रामावतार, राजा सगर की कथा, गंगा की कथा, अहिल्या उद्धार, ताडकावध, शिव धनुष, राम सीता विवाह, 


२अयोध्याकांड = राम राज्यभिषेक की तैयारी, कैकयी ने 2वर मांगे, वनवास 


3 अरण्यकांड =  दण्डकारण्य, सूर्पनखा वध, खर दूषण वध, सीता हरण, जटायु वध, राम का करुण विलाप, राम की कबंध से भेंट, शबरी वृतांत, 


4 किषकिन्धाकांड = राम सुग्रीव मैत्री, बालि वध. तारा विलाप, प्रश्रवण गिरि पर्वत पर चार महीने निवास, सीता की खोज, 


5 सुन्दरकांड =  सीता ने राम को दी चूड़ामणि, लंकादहन. 

६ युद्ध कांड = राम रावण युद्ध. लक्ष्मण को शक्ति लगना. सजींवनी बुटी लाना, सीता की अग्नि परीक्षा, राम का राजतिलक, राम भरत मिलाप,


7 उत्तरकांड 

 लवणासुर वध, राजा नृग आख्यान, ययाति आख्यान,

शंबूकवध, सीता का पाताल गमन 


रावण की माता - कैकसी 

बालि राजा था = पंपापूर का 

वाल्मीकि का पूर्व नाम - रत्नाकर 

इक्ष्वाकुवंश के राजगुरु - वशिष्ठ


               महाभारत 


विश्व साहित्य का सबसे बड़ा ग्रन्थ - महाभारत

रचनाकाल =महर्षि वेदव्यास 

श्लोक - 100000 शतसाहस्री 

आर्षकाव्य = महाभारत 

महाभारत का क्रम -

 जय(8800). भारत(24000). महाभारत(100000)

छन्द - अनुष्टुप

रस - शान्त रस 

कुल पर्व= 18

सबसे बड़ा पर्व - शान्ति पर्व

 सबसे छोटा - महाप्रस्थानिक पर्व 


1आदि पर्व, - शकुन्तलोपाख्यान, कौरव पांडवों का जन्म, चन्द्रवंशोत्तपत्ति 

2 सभा पर्व, - जरासंध का वध, शिशुपालवध, जूए में पांडवों की हार, 

3 वन पर्व,- नलोपाख्यानम्, इन्द्र द्वारा कर्ण का कवच कुंडल मांगना, जयद्रथ द्वारा द्रौपदी हरण, 

 4विराट पर्व, - पांडवों का अज्ञातवास, कीचक वध, 

 5 उद्योग पर्व, - युद्ध की पूर्व पीठिका 

6भीष्म पर्व, गीता उपदेश, भीष्म शरशय्या पर, 

7द्रोण पर्व, - द्रोण वध, 

8 कर्ण पर्व - कर्ण वध 

9 शल्य पर्व,-दूर्योधन भीम का गदा युद्ध, दूर्योधन का उरुभंङ, 

10 सौप्तिक पर्व, - द्रौपदी के पुत्रों की हत्या, दूर्योधन का प्राण त्याग, 

11 स्त्री पर्व, - कुन्ती पांडवों को करण का वृतांत सुनाती हैं, युधिष्ठिर स्त्री जाति को शाप देते हैं। 

12शांति पर्व, - भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदेश. 

13अनुशासन पर्व- शिवसहस्रनामस्तोत्र, विष्णुसहस्रनाम, भीष्म का स्वर्गारोहण। 

14 आश्वमेधिक पर्व, - युधिष्ठिर राज्य सम्भालते है, 

15 आश्रमवासिक पर्व - धृतराष्ट्र, गांधारी का वनाश्रम गमन 

16 मौसल पर्व - यादव वंश का नाश 

 17 महाप्रस्थानिक पर्व - पांडवों की हिमालय यात्रा 

18स्वर्गारोहण पर्व - युधिष्ठिर का सशरीर स्वर्ग जाना 


अज्ञातवास में पांडवों के नाम =

युधिष्ठिर - वैयाघ्रपदम 

भीम- वल्लभ 

अर्जुन - वृहन्नला 

नकुल - ग्रन्थिक 

सहदेव - अरिष्टनेमि 

द्रौपदी - सैरन्ध्री 


कुन्ती का वंश - वृष्णि वंश 

पांडवों का पुरोहित - धौम्य



      

Sanskrit Names of Medicinal Plants (herbs)

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