Wednesday, May 26, 2021

षोडश संस्काराणां क्रमशः कण्ठस्थीकरणसूत्रम्-

 

    षोडश संस्काराणां क्रमशः कण्ठस्थीकरणसूत्रम्-


गपुंसीजानान्यचूकव्युवेकेसमवर्तनैः।

विवाहान्त्येष्टिसंस्कारैर्षोडशैर्मानवोच्यते।।

१. ग  = गर्भाधान

२. पुं  = पुंसवन

३. सी = सीमन्तोन्नयन

४. जा = जातकर्म

५. ना = नामकरण

६. नि = निष्क्रमण (नि+अ)

७. अ = अन्नप्राशन

८. चू = चूडाकरण/मुण्डन

९. क = कर्णवेध

१०.वि= विद्यारम्भ (वि+उ)

११. उ= उपनयन

१२. वे= वेदारम्भ

१३.के= केशान्त/गोदान

१४.स= समावर्तन

१५.वि= विवाह

१६.अ= अन्त्येष्टि

शिशुपालवध महाकाव्यम्

 


      शिशुपालवध महाकाव्यम्



★महाकवि माघ का स्थितिकाल:- ६७५ ई. (लगभग) या भारवि के बाद का समय।


★जन्म स्थान:- भीनमाल, जिला:-जालौर,राजस्थान।


★महाकवि माघ के पिता:- श्री सुप्रभवदेव


★महाकवि माघ का जाति:- श्रीमाली ब्राह्मण


★महाकवि माघ की उपाधि:- घण्टामाघ 


★महाकवि माघ  का प्रिय छन्द:- मालिनी।


★माघ के मृत्यु का कारण:- पादशोथ रोग।


           शिशुपालवध महाकाव्य


★शिशुपालवध महाकाव्य के लेखक:- महाकवि माघ।


★शिशुपालवध महाकाव्य में कुल सर्गः-२० सर्ग


★शिशुपालवध महाकाव्य में कुल श्लोक:- १६५०


★शिशुपालवध महाकाव्य का उपजीव्य:-

  १. महाभारत का सभापर्व 

  २. श्रीमद्भागवत् पुराण का दशम स्कन्ध ।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रधान रस:- वीर रस


★शिशुपालवध महाकाव्य का सहायक रस:- श्रृंगार व हास्य।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रमुख छन्द:- वंशस्थ, अनुष्टुप, उपजाति और वसन्ततिलका।


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रमुख अलंकार:- उपमा, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति,यमक, श्लेष ,रूपक।


★शिशुपालवध महाकाव्य का नायक:- श्रीकृष्ण


★शिशुपालवध महाकाव्य का प्रतिनायक:- चेदिनरेश शिशुपाल।


★शिशुपालवध महाकाव्य की मुख्य कथावस्तु:- भगवान् कृष्ण द्वारा शिशुपाल का वध किए जाने का वर्णन।


★शिशुपाल की राजधानी:- महिष्मती


★शिशुपाल का राज्य:- चेदि


★द्वारिका का राजा:- श्रीकृष्ण


★हिरण्यगर्भ और ब्रह्मा के मानस पुत्र:- नारद जी


★शिशुपाल का मौसेरा भाई:- श्रीकृष्ण


★शिशुपालबध के तेजस्वी ऋषि:- नारद


★शिशुपाल का पूर्वजन्म:-हिरण्यकश्यपु, रावण,    शिशुपाल क्रमशः।


★शिशुपालवध महाकाव्य श्री शब्द से प्रारम्भ है और प्रत्येक सर्ग का अंत भी श्री शब्द से हीं हुआ है।


★शिशुपालबध "काव्येषु माघ:" से भी प्रसिद्ध है।


★शिशुपालवध महाकाव्य में राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर करते हैं।


★श्रीकृष्ण शिशुपाल को १००गलती माफ़ करने का वचन दे रखे थे।


★शिशुपाल का वध  श्रीकृष्ण, बलराम और उद्धव जी तीनों मिलकर किये थे।


माघ के लिए प्रचलित उक्तियाँ



१.मेघे माघे गतं वयः।


२. माघे सन्ति त्रयोः गुणाः।


३.तवाद् भा भारवेर्भाति, यावन्माघस्य नोदयः।


४. नवसर्ग गते माघे नव शब्दों न विद्यते।

त्रयी

 


          त्रयी 


1 वेदत्रयी= ऋग्वेद ,यजुर्वेद,सामवेद

2 बृहत्रयी= किरातार्जुनियम् (भारवि) शिशुपालवधम् (भाघ) नैषधीयचरितम्( श्री हर्ष)

3 लघुत्रयी= कुमारसम्भवम् ( कालिदास) रघुवंशम्( कालिदास) मेघदूतम् (कालिदास)

4 काव्यशास्त्र मे बृहत्रयी या काव्यत्रयी= ध्वन्यालोक ( आनन्दवर्धन) काव्यप्रकाश( मम्मट) रसगंगाधर ( पं राज जगन्नाथ)।

5 व्याकरण के मुनित्रय=पाणिनी , पतञ्जलि  ,कात्यायन

6 पुराणो के मुनित्रय= वेदव्यास  ,पराशर  ,शुकदेव

7शतकत्रय= श्रृंगारशतक  ,नीतिशतक, वैराग्यशतक

8 पाषाण त्रय=किरातार्जुनियम् महाकाव्य के प्रथम तीन सर्ग 1,2,3

9 आयुर्वेद के बृहत्रयी= चरकसंहिता  ,सुश्रुतसंहिता, अष्टांगहृदय।

10 जैन सम्प्रदाय के नाटकत्रयी =पंचास्तिकायसार,  समयसार , प्रवचनसार।

11👉बौद्ध दर्शन के त्रिपिटक= विनयपिटक,  सुत्तपिटक  , अभिधम्मपिटक।

12👉वेदान्त दर्शन के कठिन त्रयी=खण्डनखण्डखाद्य , तत्वदीपिका , अद्वैतसिद्धि।

13👉प्रस्थानचतुष्टयी= उपनिषद , गीता , ब्रह्मसूत्र , भागवत।

14 👉महाभारत के पंचरत्न= गीता,विष्णुसहस्त्रनाम ,अनुगीता,भीष्मस्तवराज,गजेन्द्रमोक्ष।

संस्कृत के व्याकरण ग्रन्थ और उनके रचयिता

 

     संस्कृत के व्याकरण ग्रन्थ और उनके रचयिता


संग्रह -- व्याडि (लगभग ई. पू. 400 ; व्याकरण के दार्शनिक विवेचन का आदि ग्रन्थ)


अष्टाध्यायी -- पाणिनि


महाभाष्य -- पतञ्जलि


वाक्यपदीय -- भर्तृहरि (लगभग ई. 500, व्याकरणदर्शन का सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ)


त्रिपादी (या, महाभाष्यदीपिका) -- भर्तृहरि (महाभाष्य की टीका)


काशिकावृत्ति -- जयादित्य तथा वामन (छठी शती)


वार्तिक -- कात्यायन


प्रदीप -- कैयट


सूक्तिरत्नाकर -- शेषनारायण


भट्टिकाव्य (या, रावणवध) -- भट्टि (सातवीं शती)


चान्द्रव्याकरण -- चन्द्रगोमिन्‌


कच्चान व्याकरण -- कच्चान (पालि का प्राचीनतम उपलब्ध व्याकरण)


मुखमत्तदीपनी -- विमलबुद्धि (कच्चान व्याकरण की टीका तथा न्यास, 11वीं सदी)


काशिकाविवरणपंजिका (या, न्यास) -- जिनेन्द्रबुद्धि (लगभग 650 ई., काशिकावृत्ति की टीका)


शब्दानुशासन -- हेमचन्द्राचार्य


पदमञ्जरी -- हरदत्त (ई. 1200, काशिकावृत्ति की टीका)


सारस्वतप्रक्रिया -- स्वरूपाचार्य अनुभूति


भागवृत्ति (अनुपलब्ध, काशिका की पद्धति पर लिखित)


भाषावृत्ति -- पुरुषोत्तमदेव (ग्यारहवीं शताब्दी)


सिद्धान्तकौमुदी -- भट्टोजि दीक्षित (प्रक्रियाकौमुदी पर आधारित)


प्रौढमनोरमा -- भट्टोजि दीक्षित (स्वरचित सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


वैयाकरणभूषणकारिका -- भट्टोजि दीक्षित


शब्दकौस्तुभ -- भट्टोजि दीक्षित (ई. 1600, पाणिनीय सूत्रों की अष्टाध्यायी क्रम से एक अपूर्ण व्याख्या)


बालमनोरोरमा -- वासुदेव दीक्षित (सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


रूपावतार -- धर्मकीर्ति (ग्यारहवीं शताब्दी)


मुग्धबोध -- वोपदेव


प्रक्रियाकौमुदी -- रामचन्द्र (ई. 1400)


मध्यसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


लघुसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


सारसिद्धान्तकौमुदी -- वरदराज


प्रक्रियासर्वस्व -- नारायण भट्ट (सोलहवीं शताब्दी)


प्रसाद -- विट्ठल


प्रक्रियाप्रकाश -- शेषकृष्ण


तत्वबोधिनी -- ज्ञानेन्द्र सरस्वती (सिद्धान्तकौमुदी की टीका)


शब्दरत्न -- हरि दीक्षित (प्रौढमनोरमा की टीका)


मनोरमाकुचमर्दन -- जगन्नाथ पण्डितराज (भट्टोजि दीक्षित के "प्रौढ़मनोरमा" नामक व्याकरण के टीकाग्रंथ का खंडन)


स्वोपज्ञवृत्ति -- (वाक्यपदीय की टीका)


वैयाकरणभूषणसार -- कौण्डभट्ट (ई. 1600)


वैयाकरणसिद्धान्तमञ्जूषा -- नागेश भट्ट(व्याकरणदर्शनग्रंथ)


परिभाषेन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (इस यशस्वी ग्रन्थ पर अनेक टीकाएँ उपलब्ध हैं।)


लघुशब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)


बृहच्छब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)


शब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट


वैयाकरणसिद्धान्तलघुमञ्जूषा -- नागेश भट्ट


वैयाकरणसिद्धान्तपरमलघुमञ्जूषा -- नागेश भट्ट


महाभाष्य-प्रत्याख्यान-संग्रह -- नागेश भट्ट


उद्योत -- नागेश भट्ट (पतञ्जलिकृत महाभाष्य पर टीकाग्रन्थ)


स्फोटवाद -- नागेश भट्ट


स्फोटचन्द्रिका -- कृष्णभट्टमौनि


स्फोटसिद्धि -- भरतमिश्र


परिभाषावृत्ति -- सीरदेव


परिभाषावृत्ति -- पुरुषोत्तमदेव


परिभाषाप्रकाश -- विष्णुशेष


गदा -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


भैरवी -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


भावार्थदीपिका -- परिभाषेन्दुशेखर की टीका


हरिनामामृतव्याकरण -- जीव गोस्वामी


परिमल -- अमरचन्द

रामायण (आदिकाव्य) / महाभारत



      रामायण (आदिकाव्य)


*राम+अयन =दीर्घसन्धि

*रचयिता ः महर्षि वाल्मीकि(आदिकवि) 

* सर्ग=645

*श्लोक =24000(चतुर्विंशतिसाहस्रीसंहिता)

*लौकिक संस्कृत का प्रथम श्लोक - मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समा। 

*प्रमुख छन्द - अनुष्टुप 

*मुख्य रस- करुण

*कुल काण्ड =7 बालकांड, अयोध्या,अरण्य, किषकिन्धा, सुन्दर, युद्ध, उत्तरकांड। 


*राजादशरथ +कौशल्या, कैकयी. सुमित्रा 

चार पुत्र - राम, भरत. लक्ष्मण. शत्रुघ्न। 

पुत्री =शांता (श्रृंगी ऋषि से विवाह) 


1बालकांड =क्रौञ्च प्रकरण, अश्वमेध यज्ञ का वर्णन, रामावतार, राजा सगर की कथा, गंगा की कथा, अहिल्या उद्धार, ताडकावध, शिव धनुष, राम सीता विवाह, 


२अयोध्याकांड = राम राज्यभिषेक की तैयारी, कैकयी ने 2वर मांगे, वनवास 


3 अरण्यकांड =  दण्डकारण्य, सूर्पनखा वध, खर दूषण वध, सीता हरण, जटायु वध, राम का करुण विलाप, राम की कबंध से भेंट, शबरी वृतांत, 


4 किषकिन्धाकांड = राम सुग्रीव मैत्री, बालि वध. तारा विलाप, प्रश्रवण गिरि पर्वत पर चार महीने निवास, सीता की खोज, 


5 सुन्दरकांड =  सीता ने राम को दी चूड़ामणि, लंकादहन. 

६ युद्ध कांड = राम रावण युद्ध. लक्ष्मण को शक्ति लगना. सजींवनी बुटी लाना, सीता की अग्नि परीक्षा, राम का राजतिलक, राम भरत मिलाप,


7 उत्तरकांड 

 लवणासुर वध, राजा नृग आख्यान, ययाति आख्यान,

शंबूकवध, सीता का पाताल गमन 


रावण की माता - कैकसी 

बालि राजा था = पंपापूर का 

वाल्मीकि का पूर्व नाम - रत्नाकर 

इक्ष्वाकुवंश के राजगुरु - वशिष्ठ


               महाभारत 


विश्व साहित्य का सबसे बड़ा ग्रन्थ - महाभारत

रचनाकाल =महर्षि वेदव्यास 

श्लोक - 100000 शतसाहस्री 

आर्षकाव्य = महाभारत 

महाभारत का क्रम -

 जय(8800). भारत(24000). महाभारत(100000)

छन्द - अनुष्टुप

रस - शान्त रस 

कुल पर्व= 18

सबसे बड़ा पर्व - शान्ति पर्व

 सबसे छोटा - महाप्रस्थानिक पर्व 


1आदि पर्व, - शकुन्तलोपाख्यान, कौरव पांडवों का जन्म, चन्द्रवंशोत्तपत्ति 

2 सभा पर्व, - जरासंध का वध, शिशुपालवध, जूए में पांडवों की हार, 

3 वन पर्व,- नलोपाख्यानम्, इन्द्र द्वारा कर्ण का कवच कुंडल मांगना, जयद्रथ द्वारा द्रौपदी हरण, 

 4विराट पर्व, - पांडवों का अज्ञातवास, कीचक वध, 

 5 उद्योग पर्व, - युद्ध की पूर्व पीठिका 

6भीष्म पर्व, गीता उपदेश, भीष्म शरशय्या पर, 

7द्रोण पर्व, - द्रोण वध, 

8 कर्ण पर्व - कर्ण वध 

9 शल्य पर्व,-दूर्योधन भीम का गदा युद्ध, दूर्योधन का उरुभंङ, 

10 सौप्तिक पर्व, - द्रौपदी के पुत्रों की हत्या, दूर्योधन का प्राण त्याग, 

11 स्त्री पर्व, - कुन्ती पांडवों को करण का वृतांत सुनाती हैं, युधिष्ठिर स्त्री जाति को शाप देते हैं। 

12शांति पर्व, - भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदेश. 

13अनुशासन पर्व- शिवसहस्रनामस्तोत्र, विष्णुसहस्रनाम, भीष्म का स्वर्गारोहण। 

14 आश्वमेधिक पर्व, - युधिष्ठिर राज्य सम्भालते है, 

15 आश्रमवासिक पर्व - धृतराष्ट्र, गांधारी का वनाश्रम गमन 

16 मौसल पर्व - यादव वंश का नाश 

 17 महाप्रस्थानिक पर्व - पांडवों की हिमालय यात्रा 

18स्वर्गारोहण पर्व - युधिष्ठिर का सशरीर स्वर्ग जाना 


अज्ञातवास में पांडवों के नाम =

युधिष्ठिर - वैयाघ्रपदम 

भीम- वल्लभ 

अर्जुन - वृहन्नला 

नकुल - ग्रन्थिक 

सहदेव - अरिष्टनेमि 

द्रौपदी - सैरन्ध्री 


कुन्ती का वंश - वृष्णि वंश 

पांडवों का पुरोहित - धौम्य



      

मृच्छकटिकम् के पात्र

 

       मृच्छकटिकम् के पात्र 


चारुदत्त :-- नायक, निर्धन द्विज 

मैत्रेय :--- विदूषक, चारुदत्त का मित्र

 संस्थानक :--- शकार प्रतिनायक, राजा का साला 

विट :---शकार का सहचर

 वर्धमानक :--- चारुदत्त का दास

 चेट :---- शकार का दास 

संवाहक :---- चारुदत्त का भूतपूर्व सेवक, जुआरी, बौद्ध भिक्षु 


माथुर :---सभिक, प्रधान द्यूतकर

द्यूतकर :--- जुआरी 

दर्दुरक :--- जुआरी 

कर्णपूरक :--- वसंतसेना का सेवक

 सर्विलक :---मदनिका का प्रेमी

 कुंभलीक :--- वसंतसेना का दास 

बंधुल :--- वसंतसेना का आश्रित वेश्यापुत्र 

रोहसेन :---चारुदत्त का पुत्र 

स्थावर चेट :--- शकार का दास 

चेट :---- वसंतसेना का दास 

आर्यक :--- गोपालक राजा पालक का बंदी, बाद में राजा

 वीरक :-- राजा पालक का बलपति  (नगर रक्षक)


चंदनक :---सेनापति 

शोधनक :--न्यायालय का सेवक 

अधिकरणिक :----- न्यायाधीश 

श्रेष्ठी :--- एक प्रतिष्ठित सेठ, न्याय में अधिकरणिक का सहायक

 कायस्थ :--- न्यायालय का लेखक (पेशकर)

 चांडालद्वय :--- फांसी देने वाले जल्लाद


रंगमंच पर अनुपस्थित पात्र



चूर्णवृद्ध :-- चारुदत्त का मित्र 

चालक :--- अवन्ती का राजा

रेभिल :--- चारुदत्त का गायक मित्र

 सिद्ध :--- आर्यक राज्य प्राप्ति का भविष्यवक्ता


स्त्री पात्र

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वसंतसेना :--- नायिका गणिका 

रदनिका :--- चारुदत्त की दासी 

मदनिका :--- वसंतसेना की दासी, शर्विलक की प्रेमिका

 धूता :---चारुदत्त की पत्नी 

छत्रधारिणी :--- वसंतसेना की दासी

 चेटी :--- चारुदत्त की दासी 

वृद्धा :--- वसंतसेना की माता



Words which frequently used in day to day life)

 #vocabulary


दैनिक उपयोग में लिए जाने वाले अव्यय शब्द

(Words which frequently used in day to day life )


Sanskrit    Hindi              English

                    

१ च                और                  And

२ अपि             भी                   Also

३ वा           या (प्रश्नवाचक)          Or

४ किम्             क्या                What

५ प्रत्युत            बल्कि           Rather 

६ यतः              चूँकि              Since

७ यत्                कि                That

८ यदि              अगर                  If

९ तथापि          फिर भी            Still

१० हि             क्योंकि        Because

११ विना          बिना            Without

१२ इतः           यहाँ से          From Here

१३ ततः           वहाँ से          From There

१४ कुतः         कहाँ से             From Where

१५ कुतश्चित्   कहीं से       From Somewhere

१६ यतः          जहाँ से          From There (q)

१७ इतस्ततः     इधर-उधर       Here-There

१८ सर्वतः       सब ओर से      From All Sides

१९ उभयतः  दोनों ओर से    From Both Sides

२० अधः            नीचे             Below

२१ अग्रे             आगे              Ahead

२२ अन्त:           भीतर             Within

२३ अधुना          अब                 Now

२४ तदा / तदानीम्    तब             Then

१५ आम्               हाँ                 Yes 



Sanskrit Names of Medicinal Plants (herbs)

      Sanskrit Names of  Medicinal Plants (herbs) English Name         Sanskrit Name 1. Aconite     Vatsanaabha 2. Adlay / Jobs tears       ...